नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की पिछले साल की रिपोर्ट की मानें तो साल 2019 में देश में 1.39 लाख लोगों ने दुनिया से मुंह मोड़कर आत्महत्या करने का रास्ता चुना। आंकड़ों पर गौर करें तो आत्महत्या करने वालों में 67 फीसदी लोग ऐसे थे, जिनकी उम्र 18 साल से 45 साल के बीच थी।

हराभरा वतन, डेस्क। हर साल सैकड़ों युवा सुसाइड कर इस दुनिया को अलविदा कह देते हैं। खुदकुशी एक व्यक्ति के सपनों का टूटना ही नहीं बल्कि एक परिवार की भावनाओं, समाज और देश की बहुमूल्य ऊर्जा का भी नुकसान है। जहां आत्महत्या करने वाले व्यक्ति के परिवार को आजीवन का दुख और मानसिक आघात मिलता है। वहीं देश के विकास में योगदान बनने वाले युवाओं के इस तरह से चले जाने से राष्ट्र की भी हानि होती है, लेकिन आत्महत्या की इन घटनाओं को रोका जा सकता है। आत्महत्या करने वाले व्यक्ति की पहचान कर यदि समय पर उसे अवसाद से निकाल लिया जाए तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।

युवाओं में तेजी से बढ़ा आत्महत्या करने का प्रचलन :
भारत में आत्महत्या करने के मामले पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की पिछले साल की रिपोर्ट की मानें तो साल 2019 में देश में 1.39 लाख लोगों ने दुनिया से मुंह मोड़कर आत्महत्या करने का रास्ता चुना। आंकड़ों पर गौर करें तो आत्महत्या करने वालों में 67 फीसदी लोग ऐसे थे, जिनकी उम्र 18 साल से 45 साल के बीच थी। यानि ये लोग समझदार थे और युवा थे। वहीं पहले जहां अशिक्षित या कम पढ़े लिखे लाेग ही आत्महत्या करते थे। अब शिक्षित लोगों में भी आत्महत्या करने का चलन बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत को ऐसे शीर्ष 20 देशों की सूची में रखा है, जहां सबसे ज्यादा खुदकुशी की घटनाएं होती हैं। देश में पूर्वोत्तर के इलाकों में जैसे असम, त्रिपुरा और सिक्किम में आत्महत्या के मामलों में तेजी आई है।

खुदकुशी करने वाला देता है अलग-अलग संकेत :
यदि युवाओं के साथ किशोरों की आत्महत्या की घटनाओं को भी जोड़ दिया जाए तो यह प्रतिशत 80 प्रतिशत से अधिक हो जाता है। हालांकि अधिकतर लोग सुसाइड करने से पहले कुछ न कुछ संकेत देते हैं। इसको रोकने के लिए उनकी बातचीत, अचानक व्यवहार परिवर्तन या हाव-भाव से मिले इशारों को पहचानना होगा। सुसाइड करने वाले ज्यादातर लोग पहले सामाजिक दूरियां बनाने लगते हैं। वे अपना सोशल अकाउंट बंद कर देते हैं और अधिकतर इनका फोन आपको बंद मिलेगा। वे घरों में ज्यादा रहते हैं तथा दोस्तों में घुलना मिलना व परिवार में बातचीत कम कर देते हैं। बुरी लतों की तरफ उनका झुकाव बढ़ने लगता है जैसे वे ड्रग्स का ओवरडोज लेने लगते हैं। क्राइम के सीरियल या फिल्म देखने लगते हैं। वह सुसाइड से संबंधित बातें करने लगते हैं। सामाजिक दबाव, घरेलू हिंसा, वैवाहिक संबंध, अवैध संबंध, प्यार में असफलता, आर्थिक समस्या और तुलना आदि बहुत बड़े कारण हैं खुदकुशी के। डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व में हर तीन मिनट में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है।

मोबाइल और अधूरे ज्ञान ने बढ़ा दी है आत्महत्या की दर :
युवा मनोवैज्ञानिक अनिन्दिता रॉय के अनुसार किशोर व युवाओं में कुछ अचंभित करने वाले कारण भी दिख रहे हैं। आज 9 या 10 साल के बच्चे अपनी उम्र से ज्यादा ही परिपक्व व आधे-अधूरे ज्ञान वाले हो गए हैं। उनके पास मोबाइल फोन व इंटरनेट अच्छी के साथ साथ एक बुरी चीज भी बनकर आया है। बच्चे और युवा सबकुछ बहुत जल्दी करना चाहते हैं। मोबाइल में देखकर वे जीवन के हर पहलु को बहुत जल्दी ही अनुभव करना चाहते हैं। आत्महत्या का एक प्रमुख कारण यह भी है। जिसके बाद अनहोनी होने पर परिवार वाले अपने आप को दोष देने लगते हैं और पछताते हैं कि हम प्रयास करते तो शायद यह नहीं होता। लेकिन देखने में आ रहा है कि कई बार स्थिति इतनी विकराल होती जा रही है कि कोशिश करने के बाद भी परिवार के लोग कुछ नहीं कर पाते हैं।

बच्चों से संवाद बढ़ाएं :
बच्चों की छोटी सी छोटी बात को भी तवज्जो दें और इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे करने से धीरे-धीरे आपका विश्वास होने लगेगा और बच्चे से संवाद-सम्प्रेषण होने लगेगा। अनिन्दिता का कहना था कि सम्प्रेषण जितना ज़्यादा होगा मानसिक स्वास्थ्य उतना ही बेहतर होगा।

Updated On 2 Sep 2023 10:01 AM GMT
Harabhara Vatan

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