आकृति बिल्डर पर आरोप है कि वह जानबूझ कर दिवालिया हुआ है और इससे हजारों होम वार्य के करोड़ों रुपए फंस गए हैं। बता दें कि इस मामले में जल्द ही ट्रिब्यूनल का फैसला आ सकता है।

भोपाल। राजधानी भोपाल के रियल स्टेट में अब तक के सबसे बड़ी धोखाधड़ी के मामले में अब रेरा आपराधिक कार्रवाई कर सकता है। इससे पहले इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल एनसीएलएटी दिल्ली में कार्रवाई पूरी हो चुकी है। आकृति बिल्डर पर आरोप है कि वह जानबूझ कर दिवालिया हुआ है और इससे हजारों होम वार्य के करोड़ों रुपए फंस गए हैं। बता दें कि इस मामले में जल्द ही ट्रिब्यूनल का फैसला आ सकता है। यहां तक की ट्रिब्यूनल ने आकृति बिल्डर के हेमंत सोनी के वकील की कोई भी दलील सुनने से पहले ही खारिज कर दी थी। ट्रिब्यूनल ने यहां तक कहा कि हम आपके खिलाफ रेरा की कार्रवाई में भी कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

पैसा बचाने के लिए हुआ दिवालिया :
हेमंत सोनी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल इंदौर ने पिछले साल पांच अगस्त को दिवालिया घोषित कर दिया था। इस आदेश को आकृति एक्वा सिटी होमबायर्स एसोसिएशन ने अपीलेट ट्रिब्यूनल दिल्ली में चैलेंज किया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि हेमंत सोनी जानबूझ कर दिवालिया घोषित हुआ है, ताकि उसको प्रोजेक्ट पूरा करने में जो पैसा लगने वाला है। उसको बचा सके। इसके बाद एनसीएलएटी दिल्ली ने आकृति बिल्डर के दिवालिया घोषित होने के फैसले पर रोक लगा दी थी।

तीन हजार होम बायर्स के1100 करोड़ दांव पर :
राजधानी में आकृति बिल्डर के तीन बड़े और आधा दर्जन से अधिक छोटे प्रोजेक्ट हैं, जिनमें काफी लोगों ने इनवेस्ट किया है। एक समय में यह शहर के नामचीन बिल्डरों में शुमार होता था। उसके कारण इसको कई लोगों ने इन सभी प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट किया। हालत यह है कि तीन हजार से अधिक होम बायर्स के 1100 करोड़ रुपए दांव पर लग गए हैं। इस स्थिति में बिल्डर के कई प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए हैं। इस दौरान यहां रकम इन्वेस्ट करने वाले लोगों की रकम को हेमंत सोनी ने कहीं और इन्वेस्ट कर दिया।

देश का इकलौता मामला :
रेरा के गठन से लेकर अब तक पूरे देश में यह एक ऐसा अकेला मामला है। जहां पर रेरा ने खुद किसी बिल्डर की इंसॉल्वेंसी को हायर अथॉरिटी में चैलेंज किया हो। यही कारण है कि मामले में केवल राजधानी ही नहीं बल्कि पूरे देश में इसका असर आने वाले समय में पड़ेगा। आकृति बिल्डर हेमंत सोनी जब इंसॉल्वेंट हुआ तो उसने अपीलेट अथॉरिटी में सबसे पहले ररा नहीं जा कर इस आदेश को चैंलेज किया। इसके बाद उसके खिलाफ आकृति सिटी होम बायर्स एसोसिएशन ने भी अपील दायर कर दी थी। इस मामले में तकरीबन 14 महीने चली सुनवाई के बाद अब यह स्थिति सामने आयी है।

Updated On 26 Nov 2023 4:51 PM GMT
Harabhara Vatan

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