आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस हर क्षेत्र में अपनाई जा रही है। तकनीक के इस दौर में कोई भी काम या क्षेत्र बिना एआई के अछूता नहीं है। अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल रेडियोडायग्नोसिस एवं इमेजिंग तकनीक में भी शुरू हो चुका है।

भोपाल। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस हर क्षेत्र में अपनाई जा रही है। तकनीक के इस दौर में कोई भी काम या क्षेत्र बिना एआई के अछूता नहीं है। अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल रेडियोडायग्नोसिस एवं इमेजिंग तकनीक में भी शुरू हो चुका है। इसका फायदा यह होगा कि जहां जांच रिपोर्ट एक्यूरेट मिलेगी, वहीं इससे घातक रेडिएशन का खतरा बहुत कम हो जाएगा। जिसका फायदा सीधा रेडियोग्राफर को मिलेगा। यह बात दिल्ली के रेडियोलॉजिस्ट, पद्मश्री डॉ. हर्ष महाजन ने कही। वह रविवार को एम्स भोपाल में आयोजित रेडियोग्राफरों के सम्मेलन में बोल रहे थे। इंडियन सोसाइटी ऑफ रेडियोग्राफर्स एंड टेक्नोलॉजिस्ट का 7वां राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया गया था, जिसमें देश व विदेश के कई वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट ने हिस्सा लिया।

दुनिया भर के 30 विशेषज्ञों ने दी जानकारी :
इस दो दिवसीय सम्मेलन में विकिरण प्रौद्योगिकीविदों, चिकित्सा भौतिकविदों, रेडियोलॉजिस्ट और संबद्ध विषयों के विशेषज्ञ व शोधकर्ता शामिल हुए। सम्मेलन में 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और 30 से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने अपने विचार और अनुभव साझा किए। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में थाईलैंड से डॉ. नेपापोंग पोंगनापांग, हांगकांग से डॉ. एडवर्ड चान, ग्रीस से दिमित्रिस कैटसिफारकिस और दुबई से हाशिम अल अवधी द्वारा बहुत ही रोचक चर्चाएं की गईं। जिसमे रेडियोलॉजी में वर्तमान सर्वोत्तम प्रथाओं, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिकल प्रक्रियाओं में नई प्रगति, रेडियोलॉजी में एआई का इस्तेमाल के प्रभाव और रेडियोलॉजिकल प्रेक्टिस में सही डोज की भूमिका पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में एम्स भोपाल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील मलिक भी उपस्थित थे, जिन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन की सराहना की। एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बेहतर रोगी प्रबंधन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को और बेहतर ढंग से किए जाने पर दिया साथ ही कहा कि रेडियोग्राफर और रेडियोलॉजिस्ट के बीच बेहतर तालमेल से नतीजे ज्यादा सटीक प्राप्त हो सकते हैं।

Updated On 18 Dec 2023 6:30 PM GMT
Harabhara Vatan

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