हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी एम्स में गैस पीड़ित कैंसर मरीजों को इलाज न मिलना यह हाइकोर्ट की अवहेलना है। इसके लिए गैस राहत विभाग जिम्मेदार है,

भोपाल। चार दिसंबर 2022 को एम्स भोपाल ने एक सर्कुलर जारी किया था। जिसमें लिखा हुआ था कि गैस पीड़ित कैंसर मरीजों को एम्स में मुफ्त इलाज दिया जाएगा। आदेश को जारी हुए एक साल से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक एक भी गैस पीड़ित कैंसर मरीज को एम्स में मुफ्त इलाज नहीं मिल सका है। इसका उदाहरण हैं ऐसे दर्जनों गैस पीड़ित जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। करोंद, आरिफ नगर, जेपी नगर सहित भोपाल के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले यह मरीज बीते एक साल से एम्स अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन इन्हें इलाज नहीं मिल रहा। कुछ माह पहले लीला देवी नाम की महिला यहां इलाज के लिए पहुंची थी। उनकी कीमोथैरेपी होना थी। लेकिन एम्स प्रबंधन ने कहा कि हम निशुल्क में यह इलाज नहीं कर सकते, क्योंकि गैस राहत विभाग से कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया है। इसलिए कीमोथैरेपी के लिए आपको शुल्क देना होगा।

एम्स से ज्यादा गैस राहत विभाग जिम्मेदार :
हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी एम्स में गैस पीड़ित कैंसर मरीजों को इलाज न मिलना यह हाइकोर्ट की अवहेलना है। इसके लिए एम्स भोपाल जितना जिम्मेदार है उससे कहीं ज्यादा गैस राहत विभाग जिम्मेदार है, क्योंकि दोनों संस्थाओं के बीच जो समझौता होना है, उसमें एम्स ने अपने तरफ का हिस्सा तो पूरा कर दिया, लेकिन गैस राहत विभाग ने कोई दस्तावेज या कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं की है। यही कारण है कि एम्स से गैस पीड़ित मरीज बिना इलाज लौटाए जा रहे हैं। भोपाल में 5 लाख से अधिक गैस पीड़ित हैं। दो साल पहले मप्र सरकार के गैस राहत मंत्री विश्वास सारंग ने घोषणा की थी कि सभी गैस पीड़ितों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे, ताकि वह किसी भी निजी अस्पताल में अपना इलाज करा सकें। इस घोषणा को दो साल बीत गए, लेकिन आज तक गैस पीड़ितों का आयुष्मान कार्ड नहीं बना। इसकी वजह यह है कि आयुष्मान कार्ड के लिए जो शर्त है उसके अनुसार 2012 में हुए गरीबी रेखा सर्वे में जिसका नाम है, केवल उसी का कार्ड बनेगा। जबकि भोपाल के लाखों गैस पीड़ित ऐसे हैं, जिनका नाम उस सर्वे में नहीं है।

बीएमएचआरसी से नहीं हो सका मर्जर :
यह पहली बार नहीं है जब एम्स गैस पीड़ित कैंसर मरीजों के इलाज में असफल हो रहा है। इससे पहले बीएमएचआरसी के साथ मर्जर का मामला भी उठा था जो अब ठंडे बस्ते में जा चुका है। राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर बीएमएचआरसी को एम्स के साथ जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया था। जिसमें गैस पीड़ितों को आसानी से इलाज मिल सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

हम अपनी तरफ से पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन गैस राहत विभाग की ओर रिस्पांस नहीं आ रहा है। हम हर मरीज को सिर्फ यह बोलते हैं कि गैस राहत विभाग से रेफरल लेटर लेकर आईए, अब विभाग यह भी न दे तो हमारी क्या गलती।

- डॉ. अजय सिंह, निदेशक एम्स भोपाल

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