कैथलैब में हर दिन सात से आठ मरीजों की एंजियोग्राफी और एक मरीज की एंजियोप्लास्टी या पेस मेकर प्रोसीजर किए जाते हैं।

भोपाल। कड़ाके की ठंड के चलते लोगों को लगातार हार्ट अटैक आ रहे हैं। आम दिनों के मुकाबले इन दिनों अस्पतालों में हार्ट अटैक के मामले दोगुना हो जाते हैं। इनमें से 70 फीसदी मामलों में मरीज की जान बचाने के लिए एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफी आवश्यक हो जाती है। ऐसे में हमीदिया अस्पताल की कैथलैब पिछले एक सप्ताह से बंद है। यहां मरीजों के आपरेशन नहीं हो पा रहे हैं, मजबूरन यहां से मरीज दूसरे अस्पताल में जाने को मजबूर है। दरअसल यह सारी स्थिति कैथलैब की शिफ्टिंग को लेकर खड़ी हुई है। क्योंकि कैथलैब पुरानी बिल्डिंग में है और नई ओपीडी ब्लॉक के निर्माण के लिए पुरानी बिल्डिंग को तोड़ना शुरू कर दिया गया है। बिल्डिंग को तोड़ने के दौरान वायरिंग कटने से कैथलैब के एसी बंद पड़ गए हैं, जिस कारण लैब में एक सप्ताह से हार्ट के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। इतना ही नहीं पुरानी बिल्डिंग को तोड़ने से पहले कैथलैब को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है, लेकिन अस्पताल में कहीं जगह ही नहीं मिल रही। अब हालात यह है कि अगर कैथलैब को जल्द शिफ्ट नहीं किया गया तो उसे हमेशा के लिए बंद करना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो हृदय रोगियों को एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी समेत पेसमेकर लगाने जैसे बेहद गंभीर आपरेशन नहीं हो पाएंगे। मालूम हो कि कैथलैब में हर दिन सात से आठ मरीजों की एंजियोग्राफी और एक मरीज की एंजियोप्लास्टी या पेस मेकर प्रोसीजर किए जाते हैं। इन मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा, जिसके लिए कई गुना अधिक पैसा चुकाना पड़ेगा।

जगह आवंटन को लेकर स्थिति साफ नहीं :
जानकारी अनुसार कैबलैब के लिए आधिकारिक तौर पर नए ओपीडी ब्लॉक में स्थान सुनिश्चित है, लेकिन अभी इस ब्लॉक का निर्माण होना बाकी है। इसलिए जब तक निर्माण नहीं हो जाता तब तक अस्थाई तौर पर कैथलैब को शिफ्ट किया जाना है। फिलहाल कार्डियोलाजी डिपार्टमेंट को नए भवन की 11वीं मंजिल पर शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि कैथलैब पटेल वार्ड वाली पुराने भवन में ही चल रही है। कैथलैब के पीछे का हिस्सा टूटना शुरू हो गया है, कुछ दिनों में लैब में धूल ही धूल हो जाएगी, ऐसे में यहां ऑपरेशन करना संभव नहीं होगा।

निजी अस्पतालों में चार गुना होता है खर्च हमीदिया में आपरेशन कम वर्च पर की जाती है, जबकि, निजी अस्पतालों में चार गुना तक मरीज को पैसे खर्च करने पड़ते हैं। चिकित्सकों की मानें तो इस संबंध में कई बार अधीक्षक और डीन से बात की, लेकिन उनकी ओर से कार्रवाई नहीं की गई।

नई बिल्डिंग में नहीं मिली पर्याप्त जगह :
कैथलैब को लेकर खड़ी हुई समस्या के पीछे हमीदिया अस्पताल में वार्डों को लेकर हुई बंदरबाट भी जिम्मेदार है। दरअसल जब नए भवन में विभागों के लिए वार्डों का बंटवारा हो रहा था तब कई विभाग प्रमुखों ने आपत्ति जताई थी कि प्रभावशाली एचओडी ने जरूरत से ज्यादा जगह हथिया ली। वहीं इस दौरान कार्डियोलॉजी विभाग सक्रिय नहीं रहा, ऐसे में कैथलैब के हिस्से वाली जगह किसी अन्य विभाग के पास पहुंच गई।

नई बिल्डिंग में कैथलैब के लिए स्थान दिया गया है। जब तक नया ओपीडी ब्लॉक नहीं बन जाता, तब तक कैवलैब यहां संचालित की जाएगी। हम जल्द ही लैब की शिफ्टिंग नए स्थान पर कराकर उसे चालू करवा देंगे।

-डॉ. आशीष गोहिया अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

Updated On 20 Jan 2024 3:00 AM GMT
Harabhara Vatan

Harabhara Vatan

Next Story