अब तक शहर में 20 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जिसमें 71 गर्भवती महिलाएं और 226 लोग हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव पाए गए हैं।

भोपाल। हेपेटाईटिस बी, एचआईवी दोनों का संक्रमण संक्रमित मां से, गर्भस्थ शिशु पहुंच सकता है। ऐसे में भोपाल में सबसे पहले ट्रिपल टेस्टिंग की शुरुआत की गई है। इस टेस्ट में गर्भवती महिलाओं में हेपेटाईटिस बी, एचआईवी, सिफलिस की जांच अनिवार्य कर दी गई है। यह बात बुधवार को सीएमएचओ प्रभाकर तिवारी ने एम्स भोपाल में राष्ट्रीय हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के प्रशिक्षण के दौरान कही। सीएमएचओ ने इस दौरान गंभीर बीमारियों से बचाव, ट्रिपल टेस्टिंग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब तक शहर में 20 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जिसमें 71 गर्भवती महिलाएं और 226 लोग हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव पाए गए हैं।

इस तरह किया जा रहा है इलाज :
सीएमएचओ डॉ. तिवारी ने बताया कि शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में हेपेटाइटिस एचआईवी व सिफलिस की जांच और उपचार नि:शुल्क उपलब्ध है। बीमारी से सुरक्षा देने के लिए जन्म के समय बच्चों को नि:शुल्क टीका लगाया जाता है। हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव पाए जाने पर नि: शुल्क वायरल लोड टेस्टिंग की जाती है। मां के संक्रमित होने पर नवजात को एचबी इम्यूनोग्लोबिन और पीपीटी सीटी की भी फ्री सुविधा दी जा रही है।

इस तरह करें हेपेटाइटिस बी की पहचान :
एम्स के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक सिंघई ने बताया कि हेपेटाइटिस वायरस से होने वाला एक संक्रमण है, जो लीवर को संक्रमित करता है। हेपेटाइटिस बी के मरीजों में सालों तक कोई लक्षण नहीं होते। हेपेटाईटिस बी होने पर शरीर में दर्द, पीलिया, पेट में पानी भर जाना, लीवर में दर्द होना, खून की उल्टियां, भूख ना लगना, पेट में सूजन जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

इस तरह होते हैं एचआईवी संक्रमित :
माइक्रोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. शाश्वती नेमा ने बताया कि एचआईवी संक्रमण, असुरक्षित यौन संबंध, असुरक्षित समलैंगिग संबंध, संक्रमित इंजेक्शन, संक्रमित खून से होता है।

Harabhara Vatan

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