डॉक्टर के अनुसार यदि बच्चे की उम्र दो माह तक है और सांस लेने की दर एक मिनट में 60 या उससे अधिक होने पर निमोनिया हो सकता है।

भोपाल। बच्चों में सांसों को गिनकर निमोनिया के लक्षणों को पहचाना जाता है। यह जानकारी भोपाल के जेपी अस्पताल में वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.स्मिता सक्सेना और डॉ. प्रिंसिका जैन ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र की एएनएम को प्रशिक्षण के दौरान दी। डॉ. स्मिता ने बताया कि बच्चों में सांस की गति का ठीक ढंग से परीक्षण कर निमोनिया को प्रारंभिक अवस्था में ही पहचाना जा सकता है और इसका सही उपचार किया जा सकता है।

इस तरह से पहचानें निमोनिया :
डा. स्मिता ने बताया कि निमोनिया की पहचान करने के लिए बच्चों की सांस को ठीक एक मिनट तक देखा जाता है। डॉक्टर के अनुसार यदि बच्चे की उम्र दो माह तक है और सांस लेने की दर एक मिनट में 60 या उससे अधिक होने पर निमोनिया हो सकता है। इसी तरह 2 माह से एक वर्ष तक के बच्चों में 50 या उससे ज्यादा व 1 वर्ष से 5 वर्ष तक के बच्चों में प्रति मिनट 40 या उससे ज्यादा सांस की दर होने पर निमोनिया होने की संभावना रहती है। 5 वर्ष तक के बच्चों में मृत्यु का एक बड़ा कारण निमोनिया है।

क्या है निमोनिया :
दरअसल निमोनिया फेफड़ों का संक्रमण है। जिससे फेफड़ों में सूजन आ जाती है। निमोनिया होने पर बुखार खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। तेज सांस चलना या छाती का धंसना निमोनिया के दो मुख्य लक्षण है। निमोनिया से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण, छह माह तक सिर्फ स्तनपान और उसके बाद उचित पूरक आहार, विटामिन ए का सेवन, साबुन से हाथ धोना, घरेलू वायु प्रदूषण को कम करना आवश्यक है।

29 फरवरी तक चलाया जाएगा अभियान :

सीएमएचओ भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि सर्दी के मौसम में बच्चों में निमोनिया ज्यादा होता है। इसे देखते हुए मैदानी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि इसे शुरुआत में ही पहचान कर ठीक किया जा सके। वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा निमोनिया से बचाव व जागरूकता के लिए 12 नवंबर से 29 फरवरी तक सांस अभियान संचालित किया जा रहा है।

Updated On 9 Nov 2023 4:30 PM GMT
Harabhara Vatan

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