इस सब्जी को जिमीकंद के नाम से जाना जाता है, लेकिन इसे ओल या सूरन के नाम से भी जाना जाता है। इसके बेढंगे स्वरूप के कारण अंग्रेजी में इसे एलीफेंट फुट (हाथी पांव) कहा जाता है।

हराभरा वतन। सर्दी के मौसम में बाजार में सब्जियों की भरमार सी हो जाती है। रंग-बिरंगी हरी, पीली सब्जियां किसी का भी मन लुभा लेती हैं, लेकिन इन्हीं सब्जियों में एक अजीबो गरीब बदसूरत सी सब्जी भी विशेष रूप से देखने को मिलती है, जो दिखती तो अजीब है। लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभ बहुत होते हैं। विशेष रूप से इस सब्जी को जिमीकंद के नाम से जाना जाता है, लेकिन इसे ओल या सूरन के नाम से भी जाना जाता है। इसके बेढंगे स्वरूप के कारण अंग्रेजी में इसे एलीफेंट फुट (हाथी पांव) कहा जाता है।

गुणों की खान है जिमीकंद :
देखने में तो जिमीकंद बदसूरत सा दिखता है, लेकिन यह गुणों की खान है। जिमीकंद कैंसर, मधुमेह, बवासीर और गठिया के रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है। विशेष रूप से आयरन से भरपूर होने के कारण यह शरीर में आयरन और आरबीसी की कमी में लेने से भी फायदा होता है। इसके अलावा इसमें फॉस्फोरस, पोटेशियम, मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स और ओमेगा 3 फैटी एसिड की भी प्रचुर मात्रा होती है। ऐसे में हृदय और त्वचा के लिए भी लाभदायक माना जाता है।

पौष्टिक होने के साथ स्वादिष्ट भी है जिमीकंद :
जिमीकंद जितना पौष्टिक होता है, खाने में उतना स्वादिष्ट भी होता है। विशेष रूप से शीत ऋतु में उपलब्ध यह सब्जी दीपावली से खाई जाती है और पूरी शीत ऋतु में इसका सेवन किया जा सकता है। तासीर गर्म होने से गर्मी में इसका सेवन करना ठीक नहीं रहता। जमीन के अंदर पैदा होने वाली इस सब्जी को काट दिए जाने के बाद यह लंबे समय तक ताजा बनी रहती है। जमीन से निकाले जाने के बाद यह दो साल तक ठीक बनी रह सकती है। इसका आकार बहुत बड़ा हाेता है कई बार यह 20 से 25 किलो तक की हो जाती है। कहा जाता है कि जिमीकंद जितना पुराना वह उतना ही सुरक्षित हो जाता है। पुराना होने पर इसका पानी सूख जाता है और इससे मुंह कटने का भय भी खत्म हो जाता है।

Harabhara Vatan

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