बेल में लगे हुए पुराने पीले फल एक साल बाद फिर से हरे होने लगते हैं। वहीं इसके पत्ते टूटने के 6 माह बाद तक ताजा और हरे रहते हैं।

भोपाल। प्रकृति ने हमें जीवित रहने और स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए कई अद्भुत प्राकृतिक चीजें दी हैं, लेकिन भौतिकता और विलासिता में उलझकर हम इन प्राकृतिक चीजों को धीरे-धीरे भुलाते जा रहे हैं। प्रकृति का एक ऐसा ही वरदान है बेल (Wood Apple), मान्यता है कि बेल बहुत प्राचीन वृक्ष है और लंबे समय से प्रकृति में बना हुआ है। आयुर्वेद और कई प्राचीन ग्रंथों में भी बेल के बारे में जानकारी दी गई है। प्राचीन ग्रंथों में इसे दिव्य वृक्ष की संज्ञा दी गई है। ऐसी भी मान्यता है कि बेल में लगे हुए पुराने पीले फल एक साल बाद फिर से हरे होने लगते हैं। वहीं इसके पत्ते टूटने के 6 माह बाद तक ताजा और हरे रहते हैं।

गर्मियों के मौसम में खूब बिकता है बेल का फल :
बेल के पेड़ में फूल और फल फरवरी से जुलाई तक ही होता है। इस कारण गर्मियों में इसका खूब सेवन होता है। खासकर जंगलों से सटे क्षेत्रों में बेल का फल ठेले पर खूब बिकता है। इसका फल आकार में गाेलाकार या अंडाकार होता है। सामन्यत: बेल भूले या हल्के पीले रंग का होता है। वहीं हरे रंग के फल भी बाजार में मिल जाते हैं। बेल के फल का छिलका कठाेर और चिकना होता है। इसके बीज 10-15 के समूह में छोटे, सफेद और चिकने होते हैं।

कई बीमारियों में लाभकारी है बेल:
इस अद्भुत फल का उपयोग कई तरह के विकारों में किया जाता है, लेकिन आयुर्वेद में बेल हर बीमारी के इलाज में उपयोग किया जाता है। वर्तमान में इसे हाजमे से जुड़े हुए एक पेय के रूप में जाना जाता है, लेकिन बेल की उपयोगिता इससे कहीं अधिक है। मुख्य रूप से बेल बदहजमी, दस्त, मूत्र रोग, पेचिश, डायबिटीज, ल्यूकोरिया में उपयोग किया जाता हैं। साथ ही साथ पेट दर्द, हृदय विकार, पीलिया, बुखार, आंखों के रोगों में भी बेल का सेवन बहुत लाभकारी है।

कई गंभीर रोगों में बेल का फल अद्भुत लाभ देता है। इसका उपयोग आप आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह पर कर सकते हैं, लेकिन कुछ बीमारियों में यदि इन नुस्खों का प्रयोग किया जाए तो बेल बहुत ही ज्यादा लाभ देता है ।

1. हार्ट अटैक से बचाव के लिए :
बेल के फल का गूदा देसी गाय के घी के साथ मिला लें और इस मिश्रण को भोजन के साथ लें। दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक से बचने का यह अचूक नुस्खा है। इससे रक्त में शर्करा व वसा का स्तर नियंत्रित होता है। यह ग्लूकोस के स्तर को 54 प्रतिशत तक कम कर देता है।

2. पेट के अल्सर में लाभदायक :
बेल के शरबत में फेनोलिक नामक एक घटक पाया जाता है, जो एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता हैं, यह घटक गैस्ट्रिक अल्सर को दूर करने में विशेष रूप से लाभकारी है।

3. कोलेस्ट्राॅल नियंत्रित करता है बेल :
ऐसे माना जाता है कि बेल शरीर में बेड कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित करता है। बेल के शरबत के सेवन से ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। बेल के शरबत के नियमित सेवन करने से ट्राइग्लिसराइड्स, सीरम और टिश्यू लिपिड प्रोफाइल का स्तर नियंत्रित रहता है।

4. फंगल और वायरल इन्फेक्शन को खत्म करता है बेल :
यदि आपको फंगल या वायरल संक्रमण है तो बेल के शरबत के सेवन से इस संक्रमण को खत्म करने में बहुत मदद मिलेगी। इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि बेल के शरबत में एंटीमाइक्रोबैक्टीरियल गुण होते हैं। इस कारण बेल का जूस फंगल और वायरल संक्रमण को खत्म कर देता है।

5. सूजन को कम करता है बेल :
कुछ शोध बताते हैं कि बेल के शरबत में शरीर में आई सूजन को कम करने के गुण होते हैं। हमारे शरीर में कई कारणों से सूजन आ जाती है, लेकिन यदि इस दौरान नियमित रूप से बेल के फल का उपयोग किया जाए तो तो यह शरीर में आई सूजन को कम करने में करता है और नियमित सेवन से सूजन पूरी तरह ठीक भी हो जाती है।

6. पेट दर्द को दूर कर कब्ज से दिलाता है राहत :
बेल में लैक्साटिव गुण पाए जाते हैं, जो कब्ज को दूर कर पेट दर्द में आराम देते हैं। बेल आंतों की सफाई कर इन्हें टोन भी करता है। यदि नियमित तीन से चार माह तक इसका सेवन किया जाए तो पुरानी से पुरानी कब्ज भी ठीक हाे जाती है।

Updated On 1 Sep 2023 6:40 AM GMT
Harabhara Vatan

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