सितंबर में प्रस्तावित भोपाल मेट्रो के ट्रायल से पहले एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने एक और नवाचार करते हुए प्रदेश में पहली बार 132 केवी (132 हजार वाट) की अंडरग्राउंड लाइन को बिछाया है।

भोपाल। सितंबर में प्रस्तावित भोपाल मेट्रो के ट्रायल से पहले एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने एक और नवाचार करते हुए प्रदेश में पहली बार 132 केवी (132 हजार वाट) की अंडरग्राउंड लाइन को बिछाया है। कंपनी के अनुसार इतने अधिक विद्युत ऊर्जा की लाइन को बिछाते समय सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी था। इस कारण पूरे निर्माण कार्य के दौरान कंपनी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 2.1 किमी लंबी इस लाइन गोविंदपुरा स्थित एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के 132 केवी के चंबल सबस्टेशन से सुभाष नगर स्थित भोपाल मेट्रो के 132 केवी आरएसएस सबस्टेशन तक बिछाई गई है। शुक्रवार को इस लाइन से पावर सप्लाई की शुरुआत कर दी गई। खास बात यह है कि एमपी ट्रांसको ने चार केबलों की लाइन बिछाई है। यदि तीन लाइनें ट्रिपिंग के कारण बंद हो जाएंगी, तो चौथी से पावर सप्लाई दी जा सकेगी। अधिकारियों के अनुसार इस लाइन को बिछाने में लगभग 37 करोड़ का खर्च आया है। बता दें कि भोपाल में सितंबर माह में मेट्रो का ट्रायल होना है। इसके लिए एमपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के साथ एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी भी युद्ध स्तर पर काम कर रही है।

पहली बार ह्यूमन मशीन इंटरफेस तकनीक का उपयोग :
इस नई लाइन को एमपी ट्रांसको के भोपाल स्काडा सेंटर से ह्यूमन मशीन इंटरफेस तकनीक का उपयोग करते हुए रिमोट से पावर सप्लाई दी गई है। ह्यूमन मशीन इंटरफेस तकनीक में मानवीय ऊर्जा और कम्प्यूटर मशीनों का उपयोग कर रिमोट से पावर सप्लाई उपकरणों को नियंत्रित किया जाता है। बता दें कि वर्तमान में एमपी ट्रांसको के प्रदेश में तीन स्काडा कंट्रोल सेंटर काम कर रहे हैं, जिसमें जबलपुर, इंदौर और भोपाल में इस तकनीक का उपयोग किया जाता है।

न ट्रैफिक रोका न रेलवे ने लिया ब्लाक :
इस अंडरलाइन को डालने के लिए एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी को भोपाल में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहली बार भूमिगत हो रही लाइन के लिए सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना था। इसके लिए पहली बार जमीन के नीचे लगभग 800 मीटर लंबी टनल बिछाई गई। आगे प्रभात चौराहे से सुभाष नगर जाने वाली सड़क के नीचे से इसे क्रॉस करवाया गया है। यहां लाइन की लंबाई लगभग 260 मीटर है। सुभाष नगर रेलवे क्रॉसिंग के नीचे से 79 मीटर लंबी लाइन को क्रॉस करवाकर मेट्रो सब स्टेशन तक पावर सप्लाई दी गई। खास बात यह है कि पूरे निर्माण कार्य के दौरान न तो ट्रैफिक को रोका गया और न ही रेलवे को ब्लाक लेने के लिए कहा गया।

एमपी ट्रांसको के 414 सब स्टेशनों की स्काडा से होती है मॉनिटरिंग :
मध्य प्रदेश में एमपी ट्रांसको के कुल 414 अति उच्च दाब सब स्टेशन इस तकनीक से जुड़े हुए हैं। प्रदेश में इस समय 400 केवी के 14 सब स्टेशन, 220 केवी के 88 सबस्टेशन एवं 132 केवी के 212 सबस्टेशन संचालित है। इन स्टेशनों में किसी भी तरह की खराबी आने पर या पावर सप्लाई गड़बड़ होने पर पूरे प्रदेश से इसकी निगरानी होती है। ऐसे में पहली बार डाली गई 132 केवी की अंडरग्राउंड लाइन की कहीं से भी निगरानी हो सकेगी।

हमने कई चुनौतियों का सामना करते हुए दी गई समय सीमा में इस काम को पूरा किया है। भविष्य में प्रदेश में अन्य स्थानों पर भी इस तकनीक का उपयोग किया जा सकेगा।

- शशिकांत ओझा, एमपी पावर टांसमिशन कंपनी, जबलपुर

भोपाल मेट्रो को पावर सप्लाई के लिए एमपी ट्रांसको के भोपाल स्काडा सेंटर से पहली बार 132 केवी की लाइन को अंडरग्राउंड किया गया है। इस उपलब्धि के लिए सभी को बधाई देता हूं।

- प्रद्युमन सिंह तोमार, ऊर्जा मंत्री मप्र शासन

Harabhara Vatan

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