कुछ दिन पूर्व मस्तीपुरा में रहने वाले चेतराम मीणा की बहु का निधन होने पर शोकाकुल परिजनों को श्मशान तक शव यात्रा ले जाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से ही ग्रामीणों में आक्रोश है

भोपाल। आजादी के 76 साल बाद भी हमारे गांव में किसी तरह का विकास नहीं हुआ है। कहने को तो हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, लेकिन आज भी ईंटखेड़ी ग्राम पंचायत के गांव मस्तीपुरा और भैरोपुरा के लोग श्मशान तक पैदल नहीं पहुंच सकते हैं। श्मशान तक जाने के लिए लोगों को ट्रेक्टर ट्राली का सहारा लेना पड़ता है, यह पीड़ा मस्तीपुरा के रामस्वरूप मीणा ने बताई। रामस्वरूप ने बताया कि आज चांद तक जाना तो आसान है, लेकिन गांव में किसी की मृत्यु हो जाने पर श्मशान तक जाना आसान नहीं होता है। बारिश के दिनों में जंगली पौधों और झाडिय़ों के कारण पैदल शवयात्रा निकालना मुश्किल होता है।

ट्रैक्टर से ले जाना पड़ा शव, आक्रोश में आए ग्रामीण :
कुछ दिन पूर्व मस्तीपुरा में रहने वाले चेतराम मीणा की बहु का निधन होने पर शोकाकुल परिजनों को श्मशान तक शव यात्रा ले जाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से ही ग्रामीणों में आक्रोश है और वे श्मशान तक सडक़ बनाने के लिए प्रदर्शन करने की चेतावनी दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सडक़ नहीं बनी तो इसका असर विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा और पूरे प्रदेश के समाज बंधुओं को इस समस्या की जानकारी दी जाएगी।

आसपास के गांवों में भी नहीं बनी हैं सडक़ें :
ईंटखेड़ी ग्राम पंचायत सहित आसपास के क्षेत्र में भी संपूर्ण विकास नहीं हुआ है, जिससे ग्रामीणों में रोष है। जगदीशपुरा में भी मूलभूत सुविधाओं के न मिलने से रहवासी रोष में हैं, लोगों का कहना है कि अब की बार विकास करने वाले को ही वोट दिया जाएगा। यदि विकास नहीं तो वोट नहीं की तर्ज पर काम किया जाएगा।

Harabhara Vatan

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