शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले एक दशक से बाघों का लगातार मूवमेंट बना हुआ है। ऐसे में इनकी मौजूदगी से आसपास के जंगलों में मानवीय दखल कम हुआ है। इसका असर यह हुआ कि इन क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन सुधरने के साथ सघन वन क्षेत्र बढ़ रहा है।

भोपाल। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले एक दशक से बाघों का लगातार मूवमेंट बना हुआ है। ऐसे में इनकी मौजूदगी से आसपास के जंगलों में मानवीय दखल कम हुआ है। इसका असर यह हुआ कि इन क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन सुधरने के साथ सघन वन क्षेत्र बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि अगर यह स्थिति बनी रही, तो कुछ सालों में इन क्षेत्रों में अन्य शाकाहारी वन्य प्राणी भी लौटने लगेंगे। इससे शहर के आसपास वन्य क्षेत्र बढ़ेगा, जिसका उपयोग भविष्य में पर्यटन के लिए हो सकेगा। साथ ही बाघों के बढऩे से मानव और बाघ के बीच टकराव होने की भी संभावना है। ऐसे में इसे रोकना भी जरूरी है। ऐसे में वन विभाग वन्य क्षेत्रों में स्थित गांव, आम लोगों, स्कूल और कॉलेज के छात्रों और वन्य क्षेत्रों के आसपास स्थित सोसायटी के रहवासियों को जागरूक करने का काम शुरू कर दिया है।

गांव और कॉलोनियों में जाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक :
शहरी बाघ स्वयं सेवक कार्यक्रम के तहत अलग अलग एनजीओ के प्रतिनिधि गांव, स्कूल, कॉलेज और सोसायटी में जाकर लोगों को बाघों का महत्व बताएंगे। साथ ही बाघों सहित ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर भी काम करेंगे। इस पूरे कार्यक्रम का संचालन भोपाल वन प्रभाग, वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया-आरएपी, तिन्सा फाउंडेशन और रेनमैटर फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। सीसीएफ भोपाल राजेश खरे, डीएफओ आलोक पाठक, एसडीओ आरएस भदौरिया और डीपी श्रीवास्तव इस पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग करेंगे। बता दें कि अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2022 के अनुसार भोपाल-रातापानी-खेओनी परिदृश्य में 96 वयस्क बाघों का मूवमेंट है।

इस तरह किया जाएगा बाघों के संरक्षण का काम :
भोपाल वन मंडल के एसडीओ आरएस भदौरिया के अनुसार शहरी बाघ स्वयंसेवक कार्यक्रम के तहत भोपाल शहर के आसपास के क्षेत्र में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इन स्वयं सेवकों की सहायता से बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ साथ इनका व्यवस्थित डेटा बनाया जाएगा। यह बस्तियों और उसके आसपास बाघों के आने पर एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में भी काम करेगा। इससे बाघों के साथ साथ आम लोगों की सुरक्षा भी पुख्ता होगी।

किट बांटकर की कार्यक्रम की शुरुआत :
सोमवार को एसडीओ आरएस भदौरिया और डीपी श्रीवास्तव ने केरवा स्थित ई-सर्विलांस सेंटर में 10 स्वयंसेवकों को एक किट दी है। इस किट में एक बैग, डेटा शीट, सुरक्षा बक्से के साथ कैमरा ट्रैप का एक सेट, वॉटरबॉटल और टीशर्ट सहित अन्य सामग्री शामिल है। इसकी सहायता से डेटाबेस तैयार किया जाएगा। शुरुआत में 8 मैदानी और 2 कॉर्डिनेटर को तैयार किया जा रहा है।

इस क्षेत्र को करेंगे कवर :
स्वयंसेवक रायसेन की ओर प्रेमपुरा और समरधा क्षेत्र, सीहोर की ओर खारी और आमला क्षेत्र और रातापानी की ओर झिरी को कवर करेंगे। इन क्षेत्रों में स्थित गांव, कॉलोनियों, रहवासी क्षेत्रों के साथ स्कूल और कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस कार्यक्रम की सफलता के बाद भविष्य में फील्ड स्टाफ, ई-सर्विलांस और कैमरा ट्रैप के साथ स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ताकि बाघ की बारीकी से मॉनिटरिंग हो सके।

बाघ के संरक्षण की जितनी जिम्मेदारी हमारी है। उतनी ही एक आम आदमी की भी है। बाघों से शहर के आसपास का वन क्षेत्र सुधर रहा है। ऐसे में आम लोग बाघों का महत्व जान सकें। इसलिए इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।

- आलोक पाठक, डीएफओ, सामान्य वन मंडल, भोपाल

Harabhara Vatan

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