सीएम ने कहा कि कई बार जंगल में महावत को हाथी ही मार देता है। कई वनकर्मी घनघोर जंगल में केवल डंडा लेकर ही घूमते हैं और महीने में एकाध बार ही घर जा पाते हैं। कटर जैसे वनकर्मी अल्प वेतन में काम करते हैं।

भोपाल। प्रदेश में वन, खनिज और जल सम्पदा का अपार भंडार है। देश के 13 प्रतिशत वन मध्यप्रदेश में हैं। साथ ही प्रदेश में लगातार अति-सघन वन बढ़ रहे हैं। यह बात मंगलवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने वन भवन के उद्घाटन अवसर पर कही। सीएम ने कहा कि हमारा प्रदेश टाइगर स्टेट है, इसे टाइगर स्टेट बनाए रखने के लिए वन विभाग का हृदय से अभिनन्दन करता हूं। उन्होंने कहा कि हम लेपर्ड और घडिय़ाल स्टेट भी हैं। इस अवसर पर वन मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत भी मौजूद थे। सीएम ने कहा कि वन भवन हरित भवन है, जिसमें हवा, पानी और प्रकाश के संरक्षण का पूरा ध्यान रखा गया है। यह भवन नई ऊर्जा का संचार करेगा। विभाग को कार्य करने के लिए स्थान की कोई कमी नहीं रहेगी। सीएम ने बताया कि प्रदेश में मौजूद वन क्षेत्र के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

सीएम ने इस दौरान महावत और कटर जैसे वनकर्मियों को नियमित करने की बात कहते हुए उनकी चिंता की। सीएम ने कहा कि कई बार जंगल में महावत को हाथी ही मार देता है। कई वनकर्मी घनघोर जंगल में केवल डंडा लेकर ही घूमते हैं और महीने में एकाध बार ही घर जा पाते हैं। कटर जैसे वनकर्मी अल्प वेतन में काम करते हैं। इन सभी की चिंता करना हमारा धर्म है।

प्रदेश के वन अर्थव्यवस्था का आधार :
सीएम ने प्रदेश के वनों को अर्थव्यवस्था का आधार बताते हुए कहा कि प्रदेश में अब 785 टाइगर हो गए हैं, जो पहले से अधिक हैं। बारह सिंघा, सफेद बाघ भी हमारे यहां हैं। वानिकी के क्षेत्र में नए रिकार्ड स्थापित किए गए हैं। बांस कलस्टर विकसित किए जा रहे हैं। पेसा नियम लागू करने में वन विभाग का सहयोग सराहनीय है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को चप्पल, जूता, कुप्पी, साड़ी और छाता दिए जा रहे हैं।

सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग रोकने कर रहे हैं प्रयास :
वन मंत्री विजय शाह ने इस अवसर पर जानकारी दी कि वन विभाग सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग रोकने के लिए प्रयास कर रहा है। वन समितियों को पिकअप वाहन सौंपे गए हैं। वन्य-प्राणियों के कारण मृत्यु पर आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।

Harabhara Vatan

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