बांसिया में बनी श्रीकृष्ण गौशाला तक पहुंचने का रास्ता इतना दुर्गम है कि यहां पैदल तक जाना भी मुश्किल है। बांसिया में पठार पर इस गौशाला का निर्माण किया गया है।

भोपाल। शहर से लगभग 30 किमी की दूरी पर अमझरा ग्राम पंचायत के बांसिया गांव में बनी 38 लाख की श्रीकृष्ण गौशाला दो साल पूर्व बनकर तैयार हाे गई है। इसके बाद भी इसमें शहर में आवारा फिरने वाले मवेशियों की शिफ्टिंग का काम शुरू नहीं हुआ है। जिला पंचायत द्वारा शहर में आवारा फिरने वाले मवेशियों के लिए 4.84 करोड़ की लागत से शहर में 14 गौशालाओं का निर्माण कराया गया है, लेकिन इनमें अब तक मवेशियों को रखा नहीं गया है। इसका कारण यह है कि इन गौशालाओं में बिजली और पानी जैसी सुविधाएं नहीं हैं। दूसरा इन गौशालाओं को ऐसे स्थानों पर बनाया गया है कि यहां तक पहुंचना भी टेढ़ी खीर है। बता दें कि इन गौशालाओं का निर्माण जिला पंचायत द्वारा कराया गया है। पशु पालन विभाग द्वारा यहां चारे और पशुओं के इलाज की व्यवस्था करनी है, जबकि नगर निगम को यहां आवारा मवेशियों को छोड़ना है।

बांसिया में बनी श्रीकृष्ण गौशाला तक पहुंचने का रास्ता इतना दुर्गम है कि यहां पैदल तक जाना भी मुश्किल है। अमझरा से अंदर आकर बांसिया गांव में पठार पर इस गौशाला का निर्माण किया गया है। पठार पर जाने के लिए कीचड़ और पत्थरों से भरे हुए संकरे रास्ते से होकर जाना पड़ता है। ऐसे में यहां गौशाला को तो बना दिया गया है, लेकिन मवेशियों को नहीं रखा जा रहा है। इसके कारण शहर की सड़कों पर आवारा मवेशियों को जमावड़ा है। इससे रोजाना दुर्घटनाएं हाे रही हैं, जिसके कारण लोग गंभीर रूप से जख्मी हो रहे हैं और उन्हें कई को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है।

मुख्य द्वारा तक पहुंचना भी मुश्किल :
बांसिया में गौशाला के चारों ओर जंगली झाड़ियों का कब्जा है। गौशाला के चारों ओर इतनी घनी झाड़ियां हैं कि गेट तक पहुंचना भी मुश्किल है। ऐसे में लगता है कि दो साल से यहां कोई पहुंचा भी नहीं है, जिससे समझ में आता है कि यहां गोवंश की शिफ्टिंग के लिए तीनों विभाग ही गंभीर नहीं हैं।

10 करोड़ की लागत से बननी हैं 30 गौशाला :
जिला पंचायत द्वारा शहर में आवारा गोवंश को छत देने के लिए 10 करोड़ की लागत से 30 गोशालाएं बनानी थीं। जिनमें से 3.32 करोड़ की लागत से 14 गौशालाएं बनकर तैयार हो गई हैं, जिनमें वर्तमान में 1100 से ज्यादा गोवंश को रखा गया है। दूसरे फेस में 16 गौशालाओं के निर्माण की स्वीकृति दी गई, जिनमें से दो (मनीखेड़ी और ललोई ग्राम पंचायत) में तो गोवंश रखे जा रहे हैं, लेकिन 14 गोशालाएं ऐसी हैं, जो बनकर तो तैयार हैं, लेकिन इनमें अब भी मवेशियों को नहीं रखा जा रहा है।

इन सड़कों पर मवेशियों का कब्जा :
वर्तमान में शहर की सड़कों पर 10 हजार से ज्यादा गोवंश घूम रहे हैं, जिनके कारण रोजाना हादसे होते हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति संत हिरदाराम नगर, छाेला, नारियलखेड़ा, नवबहार सब्जी मंडी, बागसेवनिया पुरानी बस्ती, शाहजहांनाबाद रेजिमेंट रोड, टीलाजमालपुरा सहित आसपास के इलाकों में है। यहां बड़ी संख्या में घरों में मवेशी पाले जा रहे हैं, जिन्हें खुले में छोड़ दिया जाता है, जिसके कारण मवेशी सड़कों पर बैठते हैं और हादसे का शिकार होते हैं। इनमें लोगों के साथ साथ गोवंश की भी मौत होती है, जिसके कारण बड़े वाद विवाद की स्थिति निर्मित होती है।

हमारा काम गोशाला में गोवंश के लिए चारे और भूसे की व्यवस्था कराना है। साथ ही उनका समय पर बेहतर उपचार करना है। यदि गोशालाओं में गाेवंश नहीं हैं, तो जिला पंचायत के अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।

- डा. अजय रामटेके, उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं

गोशालाओं का निर्माण पूर्ण हो चुका है, यहां लगभग सभी सुविधाएं भी दी गई हैं। जल्दी ही इनका संचालन शुरू कराएंगे।

- ऋतुराज, सीईओ, जिला पंचायत भोपाल

Harabhara Vatan

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