मंगलवार को मास्टर प्लान 2031 को लेकर अंतिम बार सुनवाई की गई। हंगामे के बीच मास्टर प्लान पर रोक लगाने के लिए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और कांग्रेस विधायक जयवद्र्धन सिंह ने अपना पक्ष रखा।

भोपाल। मंगलवार को मास्टर प्लान 2031 को लेकर अंतिम बार सुनवाई की गई। हंगामे के बीच मास्टर प्लान पर रोक लगाने के लिए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और कांग्रेस विधायक जयवद्र्धन सिंह ने अपना पक्ष रखा। इसी के साथ कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी, अजय गोयनका के साथ जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र सहित 105 आपत्तिकर्ताओं ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। विधायक रामेश्वर शर्मा ने मास्टर प्लान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया और इसे रद्द करने की मांग की। विधायक शर्मा के अनुसार मास्टर प्लान में जहां तालाब किनारे 100 साल से रह रहे लोगों की अनदेखी की गई है। वहीं हाल ही में बसे खानूगांव को लेकर मास्टर प्लान में कोई जिक्र नहीं है। जबकि सबसे ज्यादा प्रदूषण तालाब में खानूगांव की वजह से हो रहा है। इस दौरान किसानों ने टीएंडसीपी दफ्तर के बाहर नए मास्टर प्लान की प्रतियां भी जलाईं। किसान यूनियन अध्यक्ष अनिल यादव ने आरोप लगाया कि बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया को 2800 हेक्टर से हेक्टेयर से बढ़ाकर 3872 हेक्टेयर कर दिया गया। ऐसे में सात दशक से किसानी कर रहे किसानों को अपनी जमीन छोडऩे की नौबत आ गई है।

विधायक शर्मा ने दर्ज कराई यह आपत्तियां :

- मास्टर प्लान शहर के लिए है, लेकिन इसमें 32 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया। मास्टर प्लान के लिए ग्राम सभाओं से अनुमति लेनी थी। लेकिन इसकी पूरी तरह से अनदेखी की गई।

- संविधान के 73-74 वें संशोधन में ग्राम पंचायत को अपनी विकास योजना बनाने का अधिकार है। मुख्यमंत्री ने स्वयं इसमें सहमति दी है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र को मास्टर प्लान में सम्मिलित करने से पहले अधिकारियों को गांव की जमीन को योजना में शामिल करने के लाभ और उपयोगों की जानकारी ग्रामीणों को देनी थी।

- नए मास्टर प्लान में एफएआर को खरीदना पड़ेगा। जहां शहर में एफएआर बढ़ाने की जरूरत है। इसे बेचा जा रहा है। इससे रियल स्टेट व्यापारियों और खरीदारों की हानि होगी।

- शहर के चारों ओर रिंग रोड बनाई जा रही है, सिक्सलेन व फोरलेन सड़कें बन रही हैं। लेकिन मास्टर प्लान में विकास को लेकर कोई योजना नहीं बनाई गई।

भोपाल और अन्य शहरों में सड़क की चौड़ाई का नहीं रखा गया ध्यान :

क्रेडाई अध्यक्ष नितिन अग्रवाल ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि भूमि विकास नियम 2012 में सड़क की चौड़ाई के हिसाब से एफएआर तय किया गया है। प्रदेश के अन्य शहरों में यह लागू है, लेकिन भोपाल में इसे लागू नहीं किया गया। नहर के दोनों ओर 15 मीटर सड़क बनाने का नियम है। ऐसे में नाले और नदियों को इस नियम से क्यों अलग रखा गया।

साबरमती लेक फ्रंट की तर्ज पर विकसित हो बड़ा तालाब :
कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने सुझाव दिया कि बड़े तालाब के लेक फ्रंट को साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित हो। इससे तालाब का संरक्षण होगा और तालाब की सीमा में होने वाले अतिक्रमण और खेती के कारण तालाब में मिल रहे पेस्टिसाइड पर भी रोक लग सकेगी।

Updated On 6 Sep 2023 10:40 AM GMT
Harabhara Vatan

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