दरअसल वडोदरा से मेट्रो के तीनों कोच के आने के बाद सुभाष नगर डिपो में इंस्पेक्शन-बे पर कपलिंक कर मेट्रो के तीनों कोच को असेंबल कर मेट्रो ट्रेन में तब्दील कर दिया गया।

भोपाल। मंगलवार को पहली बार भोपाल मेट्रो की पूरी झलख नजर आई। ऑरेंज कलर की मेट्रो सूरज की तेज किरणों में देखते ही बन रही थी। दरअसल वडोदरा से मेट्रो के तीनों कोच के आने के बाद सुभाष नगर डिपो में इंस्पेक्शन-बे पर कपलिंक कर मेट्रो के तीनों कोच को असेंबल कर मेट्रो ट्रेन में तब्दील कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में सेफ्टी ट्रायल रन के पहले लगभग 15 दिन का काम बचा हुआ है, जिसे पांच दिन में पूरा करने के लिए टारगेट तय किया गया है। ऐसे में सभी अधिकारी और कर्मचारी दिन रात मेहनत कर पूरे काम को पांच दिन में करेंगे, जिससे छह दिन बाद इसका प्री टेस्टिंग ट्रायल किया जा सके।

इन कामों को निपटाने की चुनौती :
दो किमी लंबे ट्रेक पर प्री टेस्टिंग ट्रायल करने से पहले एक्यूपमेंट एसेंबलिंग और चार्जिंग का काम किया जाएगा। सेफ्टी ट्रायल टेस्ट पास करने के बाद मेन ट्रैक पर शिफ्ट किया जाएगा। जहां लगभग तीन माह तक इसका ट्रायल किया जाएगा। बता दें कि सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में मेट्रो का ट्रायल शुरू होना है। तीन माह तक ट्रायल पूरा होने के बाद आयुक्त मेट्रो रेल सेफ्टी रूट की संरक्षा को परखेंगे। उनके संतुष्ट होने के बाद ही इस रूट पर मेट्रो के संचालन की अनुमति मिलेगी।

दो शिफ्ट में किया जा रहा है काम :
मेट्रो ट्रेन कोच असेंबलिंग के बाद इसमें लगे उपकरणों की वायरिंग और कनेक्टिविटी के बाद जरूरी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने में 15 दिन का वक्त लगता है, लेकिन 25 सिंतबर के बाद होने वाले ट्रायल रन की मद्देनजर अधिकारियों को यह पूरा काम पांच दिन में निपटाना होगा और इसके लिए दो शिफ्ट में काम किया जा रहा है।

Updated On 21 Sep 2023 11:00 AM GMT
Harabhara Vatan

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