लंबे समय से शहीद के दर्जे की मांग कर रहे वन कर्मचारी अब वन संपदा की रक्षा या ड्यूटी के दौरान जान गंवाने पर शहीद कहलाएंगे। बता दें कि वन कर्मचारी पिछले 40 वर्षों से शहीद के दर्जे की मांग कर रहे थे।

भोपाल। लंबे समय से शहीद के दर्जे की मांग कर रहे वन कर्मचारी अब वन संपदा की रक्षा या ड्यूटी के दौरान जान गंवाने पर शहीद कहलाएंगे। बता दें कि वन कर्मचारी पिछले 40 वर्षों से शहीद के दर्जे की मांग कर रहे थे। लंबे समय बाद सरकार ने कर्मचारियों की इस मांग को मान लिया है। जानकारी देते हुए वन कर्मचारी मंच के अशोक पांडे, लव प्रकाश पाराशर, नरेंद्र पयासी, प्रेमलाल त्रिपाठी और आरपी वर्मा ने बताया कि वन कर्मचारियों लंबे समय से इस मांग के लिए संघर्ष कर रहे थे। जिसके बाद राज्य शासन ने वन कर्मचारियों की इस मांग को मान लिया है।

शहीद होने पर मिलेंगे 25 लाख रुपए :
जारी आदेश के अनुसार वन एवं वन्य प्राणियों की रक्षा करते हुए किसी भी वन कर्मचारी की कर्तव्य मृत्यु होने पर उसे शहीद का दर्जा दिया जाएगा। शासन ने शहीद होने पर अनुग्रह अनुदान भी 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपए कर दिया है। हालांकि कर्मचारियों को अब भी पुलिस की तरह एक करोड़ रुपए अनुग्रह अनुदान नहीं मिलेगा।

एक करोड़ किया जाए अनुग्रह अनुदान :
वन कर्मचारी मंच के अशोक पांडे ने शासन के फैसले का स्वागत करते हुए बताया कि मप्र के 24 हजार कार्यपालिक वन कर्मचारी राज्य शासन से शहीद का दर्जा देने की मांग कर रहे थे। शासन ने अब मांग तो मान ली है, लेकिन पुलिस के समान अनुग्रह अनुदान एक करोड़ रुपए रुपए नहीं किया है। शासन को अनुदान राशि एक करोड़ करना चाहिए। ताकि कर्मचारी पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य का पालन कर सकें।

Updated On 13 Oct 2023 8:10 AM GMT
Harabhara Vatan

Harabhara Vatan

Next Story