जेपी, हमीदिया सहित एम्स में फीवर क्लीनिक बंद हैं। सीएमएचओ कार्यालय में अभी तक आरटीपीसीआर टेस्ट और कोरोना पॉजीटिव सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग का कोई डाटा मौजूद नहीं है।

भोपाल। चीन में मिले नए वायरस के कारण केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को विशेष निर्देश दिए हैं। जिसमें वायरल इंफेक्शन से पीड़ित लोगों की आरटीपीसीआर जांच करने को कहा गया है, लेकिन भोपाल के किसी भी सरकारी अस्पताल में इस निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है। जेपी, हमीदिया सहित एम्स में फीवर क्लीनिक बंद हैं और यहां सामान्य सर्दी जुकाम का ही इलाज दिया जा रहा है। सीएमएचओ कार्यालय में अभी तक आरटीपीसीआर टेस्ट और कोरोना पॉजीटिव सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग का कोई डाटा मौजूद नहीं है। डेंगू व अन्य मौसमी बीमारियों के बाद अब बच्चों में वायरल इंफेक्शन तेजी से बढ़ रहा है। एम्स, हमीदिया व जेपी अस्पताल में बच्चों के सभी वार्ड फुल चल रहे हैं। वहीं ओपीडी में सामान्य दिनों के मुकाबले इन दिनों बच्चों की संख्या दो से तीन गुना तक बढ़ गई है। जानकारी अनुसार दो सप्ताह पहले से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। तीन महीने से लेकर तीन साल के शिशुओं में सर्दी, खांसी, जुकाम के साथ-साथ तेज बुखार के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसको लेकर सीएमएचओ ने जिले के सभी अस्पतालों को सभी तरह के इंतजाम रखने के निर्देश जारी किए हैं।

ओपीडी में तीन गुना हुई मरीजों की संख्या :
वायरल इंफेक्शन के चलते सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ शहर के निजी अस्पतालों में भी ओपीडी में पहुंचने वाले बच्चों की संख्या दो से तीन गुना तक हो गई हैं। जेपी में जहां हर दिन सौ बच्चे ओपीडी में रजिस्टर्ड होते थे, अब 220 तक संख्या पहुंच रही है। इसके अलावा हमीदिया में यह आंकड़ा 350 से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। एम्स में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। निजी अस्पताल या क्लीनिक की बात करें तो यहां भी बच्चों का इलाज कराने आए पेरेंट्स की भीड़ देखी जा सकती है।

बच्चों में बढ़ते संक्रमण के कारण सरकारी अस्पतालों में ज्यादा हालात खराब हैं। यहां बनाए गए न्यू बोर्न सिक यूनिट और पीडियाट्रिक इंसेंटिव केयर यूनिट में जितने भी बेड हैं, सभी फुल हो गए हैं। जेपी अस्पताल की बात करें तो यहां शिशु रोग वार्ड में 25 बिस्तर हैं, जिन पर 30 से ज्यादा बच्चों को भर्ती किया गया हैं। वहीं आईसीयू में दस बिस्तर हैं, इन पर भी 13 से ज्यादा बच्चे एडमिट हैं। इस तरह अकेले जेपी अस्पताल में 43 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं। एम्स व हमीदिया में भी बेड की निर्धारित संख्या से ज्यादा बच्चों को भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है।

वायरल बुखार निमोनिया का ही रूप
जेपी अस्पताल के पीआईसीयू इंचार्ज डॉ. पियूष पंचरत्ने से बात करने पर उन्होंने बताया कि बच्चों को सर्दी खांसी के साथ बुखार के भी लक्षण हैं। सामान्य वार्ड में भर्ती कर उन्हें इलाज दिया जा रहा है। जिन बच्चों की हालत ज्यादा बिगड़ रही है उन्हें पीआईसीयू में एडमिट किया जा रहा है। यहां कुछ बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया जा रहा है। बच्चों में फैल रहे इस वायरल को निमोनिया कहा जाता है। जिसमें कमजोरी के साथ साथ बच्चों को सांस लेने में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस मामले में एक अच्छी बात यह है कि अभी तक इससे वायरल से किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है।

Updated On 14 Dec 2023 5:50 PM GMT
Harabhara Vatan

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