टीटी नगर स्थित कैलाशनाथ काटजू अस्पताल में संक्रमण कंट्रोल के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। अब यहां भर्ती मरीज के परिजनों को अलग से जूते चप्पल मुहैया कराए जाएंगे, ताकि वार्ड में संक्रमण न फैले।

भोपाल। टीटी नगर स्थित कैलाशनाथ काटजू अस्पताल में संक्रमण कंट्रोल के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। अब यहां भर्ती मरीज के परिजनों को अलग से जूते चप्पल मुहैया कराए जाएंगे, ताकि वार्ड में संक्रमण न फैले। जानकारी अनुसार काटजू अस्पताल में मरीज और उनके परिजनों को आईसीयू के बाद वार्ड में भी बाहर के जूते चप्पल पहनने की अनुमति नहीं होगी। यह पहला मौका है जब शहर के सरकारी अस्पताल में इनफेक्शन कंट्रोल के लिए इस तरह की सख्ती दिखाई जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार एक जूते के सोल पर औसतन 4 लाख से अधिक यूनिट बैक्टीरिया होते हैं। जिससे आंतों, मूत्र पथ, फेफड़ों, निमोनिया, मेनिनजाइटिस के साथ अन्य संक्रमण हो सकते हैं। अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार यह नियम कई दिनों से लागू है।

इस कारण शुरू हो रही नई व्यवस्था :
अस्पताल के स्टाफ के अनुसार एक दिन एक परिजन बिना पैर में कुछ पहने अस्पताल में घूम रहा था। जिसको देख अस्पताल अधीक्षक कर्नल प्रवीण सिंह ने मरीजों के साथ परिजनों के लिए भी चप्पल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मरीज इन चप्पलों का उपयोग सिर्फ अस्पताल भवन में ही कर सकेगा। यही नहीं इन चप्पलों को सप्ताह में एक बार संक्रमण रहित भी किया जाएगा।

जूते-चप्पल से इतना खतरा :
जूते चप्पल के सोल में मौजूद बैक्टीरिया के कारण क्लोस्ट्रीडियम डिफ्फिसिल से पेट की गंभीर बीमारी, लगातार दस्त, पेट दर्द और सूजन हो सकती है। इसके अलावा स्टाफीलोकोकस ऑरीअस से हृदय संक्रमण, रक्त संक्रमण, त्वचा संक्रमण जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। कोविड 19 जूतों के माध्यम से आसानी से फैलता है। ये वायरस तीन दिनों तक जूतों में रह सकते हैं।

इनका कहना है :
मरीजों को बाहरी संक्रमण से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है। मरीज और उनके परिजनों को अस्पताल से ही चप्पल दी जाएगी।

- कर्नल प्रवीण सिंह, अधीक्षक काटजू अस्पताल

Harabhara Vatan

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