गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग पर्यावरण प्रदूषण से अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे में प्रदूषण की समस्या को छोटे बदलावों से कम किया जा सकता है।

भोपाल। जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर अंतरविभागीय कार्यशाला गुरूवार को पर्यावरण एवं नियोजन संगठन (एपको ) में स पन्न हुई। कार्यशाला की शुरुआत में सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी ने कहा कि प्रदूषित पर्यावरण असर हर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर होता है। किंतु यातायात पुलिस, नगर निगम के कचरा इकट्‌ठा करने वाला स्टाफ, उद्योग क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों पर इसका असर ज्यादा पड़ता है। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग पर्यावरण प्रदूषण से अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे में प्रदूषण की समस्या को छोटे बदलावों से कम किया जा सकता है। भोपाल के स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में यातायात पुलिस, लोक निर्माण विभाग, उद्योग विभाग, जल संसाधन विभाग, स्कूल शिक्षा, पंचायत विभाग, कृषि विभाग, इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। कार्यशाला में गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सलिल भार्गव और ए स भोपाल के डॉ अंकुर जोशी के साथ एपको के विशेषज्ञों ने पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी।

छोटे उपायों से रोक सकते हैं प्रदूषण :
सीएमएचओ डॉ. तिवारी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए छोटे-छोटे उपाय को अपने दैनिक जीवन में अपना सकता है। सार्वजनिक वाहनों अथवा साइकिल का उपयोग, ट्रैफिक सिग्नल पर गाड़ी के इंजन को बंद करना ,पानी का अपव्यय कम करना, पेड़ पौधे लगाना, वर्षा जल का संग्रहण, सूखे एवं गीले कचरे को अलग अलग करना, एलईडी लाइट का इस्तेमाल, बिजली के उपयोग को कम करना, जैसे छोटे-छोटे तरीके आसानी से अपनाए जा सकते हैं ।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ पर्यावरण जरूरी :
गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सलिल भार्गव ने कहा कि स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए पर्यावरण को ठीक रखना जरूरी है। पर्यावरण प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य को रोज खराब कर रहा है। पर्यावरण को प्रदूषित कर हम अगली पीढ़ी के लिए बीमारियां छोड़ रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण का प्रत्यक्ष असर हमारे श्वसन तंत्र, त्वचा, आंखों पर सबसे पहले दिखाई देता है। स्वस्थ पर्यावरण हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। तंबाखू के धुएं और दूषित पर्यावरण क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज (सीओपीडी ) का प्रमुख कारण है। जिससे क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

एम्स चिकित्सालय के कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉ. अंकुर जोशी ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग का नकारात्मक असर इंसानों, पशु, पक्षियो, नदियों, पेड़ों पर पड़ता है। वैश्विक तापमान के मात्र आधा डिग्री बढ़ जाने से ही बाढ़ आने की संभावनाएं 70 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। आधा डिग्री ग्लोबल टेंपरेचर बढऩे पर हीट स्ट्रोक 28 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

Updated On 20 Oct 2023 9:10 AM GMT
Harabhara Vatan

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