चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को लॉन्च किया गया था। वहीं अब यह चंद्रमा की ऑर्बिट में जाने वाला है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि कल (सोमवार) पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए चंद्रमा की ऑर्बिट की तरफ बढ़ेगा।

बेंगलुरु। चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को लॉन्च किया गया था। वहीं अब यह चंद्रमा की ऑर्बिट में जाने वाला है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि कल (सोमवार) पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए चंद्रमा की ऑर्बिट की तरफ बढ़ेगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह चंद्रमा की ऑर्बिट में जाएगा और उसके बाद यह सबसे इनर सरफेस में जाएगा।

23 अगस्त को चंद्रयान 3 होगा लैंड :
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि चंद्रमा की ऑर्बिट में जा कर यह शिनाख्त करेगा कि साउथ पोल एरिया में कहां पर इसे लैंड होना है। जितेंद्र सिंह ने बताया कि अगस्त के पहले सप्ताह में यह चंद्रमा की ऑर्बिट में पहुंच जाएगा। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-3, 23 अगस्त को साउथ पोल एरिया में एक जगह पर लैंड हो जाएगा। पृथ्वी से चंद्रमा तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-3 ने 5 बार अपने ऑर्बिट को बदला है। पृथ्वी और चंद्रमा के बीच का जो रास्ता है, उसे हाइवे कहा जाता है। चंद्रयान की पेरोजी और एपोजी भी बदली गई है। अब चंद्रयान 71,351 किलोमीटर की एपोजी और और 233 किलोमीटर की पेरोजी में चक्कर लगा रहा है।

बता दें कि 17 अगस्त को प्रोपल्शन सिस्टम लैंडर-रोवर से अलग होगा। मॉड्यूल के अलग होने के बाद लैंडर रोवर को चंद्रमा की कक्षा में डाला जाएगा। इसे ऑर्बिट में लाने के लिए चंद्रयान-3 की डीबूस्टिंग की जाएगी। मतलब उसकी गति कम की जाएगी। 23 अगस्त को लैंडिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

चंद्रयान-3 चांद की सतह पर लैंडिंग का प्रयास कर रहा :
चंद्रयान-3 चांद की सतह पर लैंडिंग का प्रयास कर रहा है। ऐसी जगह पर यह लैंडिंग का प्रयास कर रहा है, जहां पर अब तक किसी भी देश ने लैंडिंग की कोशिश तक नहीं की है। दुनिया में 11 देश हैं, जिन्होंने अपने मून मिशन भेजे हैं। अगर भारत का यह मिशन सफल होता है, तो दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडर उतारने वाला भारत पहला देश बन जाएगा। चंद्रयान-3 को दक्षिणी ध्रुव के पास उतारा जा रहा है न कि दक्षिणी ध्रुव पर। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक स्थित क्रेटर के पास चंद्रयान-3 को उतार सकता है।

Harabhara Vatan

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