सोमवार को हुई डिपो में टेस्टिंग के बाद मंगलवार को पहली बार भोपाल मेट्रो को वायडक्ट के ट्रैक पर उतारा गया। पांच किमी के प्रायोरिटी कॉरिडोर में मेट्रो ने तीन राउंड लगाकर लगभग 30 किमी की दूरी तय की।

भोपाल। सोमवार को हुई डिपो में टेस्टिंग के बाद मंगलवार को पहली बार भोपाल मेट्रो को वायडक्ट के ट्रैक पर उतारा गया। इस दौरान पहली पांच किमी के प्रायोरिटी कॉरिडोर में मेट्रो ने तीन राउंड लगाकर लगभग 30 किमी की दूरी तय की। सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के बीच चल रही प्री टेस्टिंग के दौरान मेट्रो को 10 से 50 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर मल्टीपल स्पीड से दौड़ाया गया और इसकी तकनीकी जांच सहित ब्रेकिंग प्रणाली और अन्य चीजों की जांच की गई। मेट्रो को सुबह लगभग 11.45 पर सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन से चलाया गया और शाम छह बजे तक मेट्रो की टेस्टिंग चलती रही। इस दौरान दोपहर 12.30 बजे गुरुदेव गुप्त चौराहे और प्रेस कॉम्पलेक्स के पास मेट्रो को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। बता दें कि दो अक्टूबर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में मेट्रो के ट्रायल रन की शुरुआत की जाएगी, जो कि लगभग तीन माह तक चलेगा।

एक हफ्ते में की गई तीन कोच की असेंबलिंग :
गुजरात के सावली से मेट्रो की पहली खेप 18 सितंबर को भोपाल पहुंची थी। मेट्रो की टेक्निकल टीम ने एक हफ्ते की कड़ी मेहनत के बाद इसके तीन कोच को एक साथ जोडक़र असेंबल किया है।

बेकार ऊर्जा का भी होगा इस्तेमाल :
750 वोल्ट डीसी करंट से दौडऩे वाली भोपाल मेट्रो ब्रेकिंग के दौरान व्यर्थ जाने वाली ऊर्जा का भी पूरी तरह से इस्तेमाल करेगी। दरअसल इस ट्रेन कां संचालन थर्ड रेल डीसी ट्रैक्सन सिस्टम होगा, इसके लिए ट्रैक पर खास तरह का इन्वर्टर लगाया जाएगा। जिसमें ब्रेकिंग के दौरान निकलने वाली ऊर्जा को वापस ग्रिड में भेज दिया जाएगा। बेंगलुरु, कोच्चि, अहमदाबाद, कोलकाता और गुडग़ांव मेट्रो में ब्रेकिंग से पैदा होने वाली डायरेक्ट करंट (डीसी) ऊर्जा पूरी तरह बेकार चली जाती है, लेकिन भोपाल और इंदौर में इस ऊर्जा का फिर से इस्तेमाल होगा।

बता दें कि आम तौर पर मेट्रो का संचालन ओएचई तार के जरिए हाता है, दिल्ली सहित कई शहरों में ओएचई के जरिए मेट्रो ट्रेन का पॉवर सप्लाई दी जाती है। जबकि भोपाल इंदौर में थर्ड रेल या कंडक्टर रेल के जरिए ट्रेन को पावर सप्लाई दी जा रही है। यहां मेट्रो की दाहिनी पटरी के समानांतर थर्ड रेल बिछाई गई है।

750 डीसी करंट को 33 केवी एसी में बदलेगा कन्वर्टर :
ट्रेन के संचालन के दौरान ब्रेकिंग से जो ऊर्जा पैदा होती है, वह डीसी फार्म में होती है। मेट्रो ट्रेन डीसी करंट से संचालित होती है, जबकि बाकी मेट्रो तंत्र अल्टरनेटिंग करंट (एसी) पर चलता है। ऐसे में ब्रेकिंग के दौरान बर्बाद होने वाले 750 वोल्ट डीसी करंट को 33 केवी एसी करंट में बदलकर फिर से सिस्टम में भेज देगी। एमपी मेट्रो के इंजीनियरों ने थर्ड रेल डीसी ट्रैक्शन सिस्टम के लिए खास इन्वर्टर बनाया है, जो ऊर्जा को बदलने का काम करेगा।

Updated On 27 Sep 2023 7:20 AM GMT
Harabhara Vatan

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